Sun Rays: Nature's Priceless Gift
सूर्य किरण : प्रकृति का अनमोल वरदान
सूर्य किरण : प्रकृति का अनमोल वरदान
आदिकाल से ही सूर्य उपासना की परम्परा रही है । वेदों में सूर्य उपासना को अत्यंत महत्व दिया गया है । सूर्य असीम उर्जा का स्त्रोत है । पृथ्वी पर जीवन का कारण ही सूर्य है । पौधों में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया सूर्य के प्रकाश में ही संभव है जिसके फलस्वरूप सृष्टि को भोजन प्राप्त होता है । जल चक्र की प्राकृतिक प्रक्रिया का कारण भी सूर्य ही है ।
भारतीय शास्त्रों के अनुसार जो ब्रह्मांड में है, वही पिंड अर्थात् शरीर में है । शरीर पंचमहाभूतों अर्थात् पृथ्वि, जल, वायु, अग्नि एवं आकाश तत्त्व से बना है । इसमें सूर्य अग्नि तत्त्व या शारीरिक उष्मा के रूप में जीवन का संरक्षण करता है । प्राकृतिक चिकित्सा के मूलभूत सिद्धांतों के अनुसार पंचमहाभूतों का संतुलन स्वास्थ शरीर एवं मन के लिए आवश्यक है । क्योंकि सूर्य या अग्नि तत्त्व शरीर को उष्मावान एवं उर्जावान रखता है, अत: अग्नि तत्त्व की संतुलित मात्रा मनोकायिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है ।
आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में भी सूर्य की किरणों का अत्यंत महत्व है । इन्हीं से शरीर में विटामिन ‘डी’ का संश्लेषण होता है जो न केवल अस्थियों के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है बल्कि अनेक अन्य जैवरासायनिक कार्य नियोजित करता है । हाल ही में किए गए अनेक शोध सिद्ध कर रहे हैं कि विटामिन ‘डी’ का योगदान सम्पूर्ण स्वास्थ्य में है जिसमें मधुमेह, स्त्रियों में प्रजनन तंत्र संबंधी समस्याएँ आदि सम्मिलित हैं । यही नहीं, धूप एवं विटामिन ‘डी’ की कमी को अनेक मानसिक एवं मनोदैहिक रोगों से जोड़ा जा रहा है ।
आधुनिक जीवन पद्धति में धूप में बाहर कार्य करने की परम्परा लुप्त सी हो गई है । जहाँ पहले घर के दालान या अहाते में सारा काम होता था,वहीं आज लोग बंद दरवाज़े-खिड़कियों के पीछे या ए.सी. में पूरा दिन निकाल देते हैं । इसका प्रभाव अब दृष्टिगोचर होने लगा है । रोगियों की संख्या, जो आधुनिक तकनीकों के विकास से घटनी चाहिए, बढ़ती जा रही है ।
प्राकृतिक चिकित्सा में बहुत ही सरल विधि से अग्नि तत्त्व की कमी को पूरा करने के लिए सूर्य स्नान लिया जाता है । इसमें व्यक्ति को कम वस्त्रों में दिन को निश्चित अवधि के लिए सूर्य की किरणों में लिटाया जाता है । प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार 7 से 9 बजे प्रात: एवं 4 से 6 बजे सांय का समय सर्वश्रेष्ठ माना गया है, लेकिन शोधों के द्वारा यह सिद्ध किया गया है कि शरीर दोपहर के समय सूर्य की किरणों का बेहतर अवशोषण करता है । सूर्य स्नान लेने के अनेक प्रकार प्रचलित हैं । उनमें से प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं :
सूर्य स्नान के लाभ:
इस प्रकार सूर्य चिकित्सा के विभिन्न प्रयोगों के द्वारा बिना किसी खर्च के स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया जा सकता है । सूर्य चिकित्सा प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति की सशक्त शाखा हैं जो सही तरीके से अथवा चिकित्सक के निर्देशानुसार प्रयोग करने पर अनेक रोगों की रोकथाम एवं उपचार में सहायक हो सकता है ।
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Writer : Dr. Jyoti Keswani
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