Effect of Hypnotherapy:
वर्तमान समय में कैंसर लोगों में बढ़ती एक गंभीर समस्या है. कैंसर का नाम आते ही इसकी भयावहता और डर तथा रोगी को होने वाले कष्ट से सभी परिचित हैं. सब जानते हैं कि यह एक गंभीर और घातक बीमारी है. एक बार यदि कोई इसकी चपेट में आ जाए तो फिर इससे उबरना बहुत मुश्किल हो जाता है।
यद्यपि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में कैंसर के उपचार एवं रोकथाम की अनेक तकनीकें मौजूद हैं और प्रभावशाली भी हैं, परंतु इस रोग में रोगी को बीमारी के अतिरिक्त और भी अन्य समस्याओं से जूझना होता है. जैसे- तनाव, चिंता, अवसाद, क्रोध, निराशा. इसके साथ ही चिकित्सा के दुष्प्रभाव भी दूसरी कई जटिल समस्याओं को उत्पन्न कर जीवन को असामान्य कर देते हैं. रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी, सर्जरी - यह सब उपचार विधियाँ कैंसर के उपचार में में प्रयुक्त की जाती हैं. इनसे रोग का उपचार तो होता है, परंतु रोग के साथ उत्पन्न हुई अन्य मानसिक व भावनात्मक समस्याएँ और जीवनीशक्ति पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव का समाधान इन प्रचलित उपचार तकनीकों में नहीं है।
ऐसे में कैंसर की समस्या ठीक होने पर भी रोगी के जीवन में दूसरी जटिलताएँ बनी रहती हैं. ऐसे में यह आवश्यकता है कि कैंसर के उपचार के साथ-साथ ही इससे संबंधित अन्य समस्याओं एवं परेशानियों के प्रबंधन एवं समाधान की प्रक्रिया भी अपनाई जाए।
देव संस्कृति विश्वविद्यालय के नैदानिक मनोविज्ञान विभाग के अंतर्गत वर्ष-2017 में कैंसर मरीजों के उपचार एवं स्वास्थ्य प्रबंधन में सहयोगी तकनीक की खोज के रूप में एक विशिष्ट शोध अध्ययन संपन्न किया गया है. इस शोध में हिप्नोथेरेपी के माध्यम से कैंसर रोगी की शारीरिक, भावनात्मक और व्यावहारिक समस्याओं को दूर करने में सहयोगी प्रभावी तकनीक को खोजने का प्रयास किया गया है।
शोधार्थी विकास कुमार शर्मा द्वारा किया गया यह महत्त्वपूर्ण शोध अध्ययन विश्वविद्यालय के श्रद्धेय कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्या जी के विशेष संरक्षण, निर्देशन तथा डॉ. राकेश कुमार व डॉ. गौरव गुप्ता के सह-निर्देशन में पूरा किया गया है. इस शोध का विषय है- “इफेक्ट ऑफ हिप्नोथेरेपी ऑन मेलिग्नेंसी एंड एसोसियेटेड कन्डिशंस”
वैज्ञानिक प्रयोग एवं विश्लेषणात्मक विधि पर आधृत इस शोध अध्ययन की प्रयोगात्मक प्रक्रिया को पूरा करने के लिए शोधार्थी द्वारा कन्वेनियन्स सैंपलिंग मैथड द्वारा जवाहरलाल नेहरू कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (JNCHRC), भोपाल, मध्य प्रदेश से 57 लोगों का चयन किया गया।
ये नियमित रूप से कैंसर रोग की चिकित्सा हेतु अस्पताल आ रहे थे तथा सभी की उम्र अठारह वर्ष से अधिक थी. प्रयोग प्रारंभ करने से पूर्व सभी चयनितों का शोध में सम्मिलित परीक्षण उपकरणों द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण किया गया. जिन उपकरणों को प्रयुक्त किया गया वे हैं-
(1) डिजिटल केलिपर,
(2) न्यूमेरिकल रेटिंग स्केल (NRS),
(3) प्रोफाइल ऑफ मूड स्टेट्स स्टैंडर्ड (POMS) तथा
(4) इन्फ्रारेड थर्मामीटर (नान-कान्टेक्ट थर्मामीटर) ।
परीक्षण के उपरांत शोधार्थी द्वारा प्रयोगात्मक समूह को हिप्नोथेरेपी चिकित्सा प्रदान की गई. प्रयोग की कुल अवधि में प्रत्येक मरीज को पंद्रह सत्रों में हिप्नोथेरेपी प्रदान की गई. एक सप्ताह में इस थेरेपी के प्रतिव्यक्ति चार सत्र आयोजित किए गए तथा थेरेपी प्रदान करने की अवधि एक घंटे रखी गई। प्रयोग की अवधि पूर्ण होने पर पूर्व की भाँति ही सभी चयनित मरीजों का पुनः शोध उपकरणों द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण किया गया. दोनों परीक्षणों से प्राप्त आँकड़ों का सांख्यिकीय विश्लेषण करने पर शोध परिणाम के रूप में यह पाया गया कि हिप्नोथेरेपी चिकित्सा का कैंसर मरीज के ट्यूमर के आकार, दरद, चिंता स्तर, अवसाद, थकान, भ्रम और निराशा स्तर पर सार्थक प्रभाव पड़ता है. कैंसर रोग एवं इससे संबंधित अन्य शारीरिक, भावनात्मक एवं व्यवहार संबंधी समस्याओं के प्रबंधन में हिप्नोथेरेपी का सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
इस महत्त्वपूर्ण शोध अध्ययन का निष्कर्ष यह स्पष्ट संकेत देता है कि कैंसर रोग के प्रबंधन में हिप्नोथेरेपी एक प्रभावी तकनीक है. साइको ओन्कोलॉजी मॉडल कैंसर के उपचार का समग्र एवं प्रभावी तरीका कहा जा सकता है. शोध अध्ययन का सबसे महत्त्वपूर्ण पहलू शोधार्थी द्वारा चयनित मनोचिकित्सा की एक विशिष्ट विधि हिप्नोथेरेपी है।
यह एक ऐसी चिकित्सापद्धति है, जो रोगी के संपूर्ण जीवन में सकारात्मक परिवर्तन उत्पन्न करती है जो सकारात्मक विचार, अभिवृत्ति, व्यवहार और भावनाओं के रूप में दिखाई देता है. हिप्नोथेरेपी के रूप में मनोचिकित्सा की प्रक्रिया को इस अध्ययन में क्रमशः सात सोपानों में विभाजित कर प्रयुक्त किया गया है।
हिप्नोथेरेपी का प्रथम सोपान है रोगी को इस विशिष्ट मनोचिकित्सा विधि से संबंधित महत्त्वपूर्ण एवं आवश्यक जानकारी प्रदान करना तथा विधि के प्रति उनमें सकारात्मकता एवं विश्वसनीयता को सुनिश्चित करना है।
दूसरे सोपान हिप्नोटिक इन्डक्शन के अंतर्गत रोगी के मन को कृत्रिम निद्रावस्था की स्थिति में ले जाने हेतु प्रेरित किया जाता है. यह कार्य कुशल एवं प्रशिक्षित विशेषज्ञ के द्वारा ही किया जाता है कृत्रिम निद्रा के लिए प्रयोगकर्त्ता प्रायः नेत्रों की स्थिरता या हाथों को उत्तोलित करने की तकनीक अपनाते हैं तथा हिप्नोथेरेपी के लिए निर्धारित निर्देशों का पालन करते हैं।
तीसरा सोपान 'डीपनिंग ऑफ हिप्नोसिस' का है, जिसमें श्वसन प्रक्रिया का नियंत्रण एवं सजगता उत्पन्न कर आंतरिक विश्रांति की भावना को गहन किया जाता है. रोगी की मानसिक अ सजगता को उस स्तर पर पहुँचाया जाता है, जहाँ गहन विश्रांति में होते हुए भी रोगी की आंतरिक चेतना प्रयोगकर्त्ता के निर्देशों को ग्रहण कर सके।
चतुर्थ सोपान में जब प्रयोगकर्त्ता यह सुनिश्चित कर लेता है कि रोगी पूर्णरूपेण हिप्नोसिस की अवस्था में पहुँच गया है अर्थात बाह्य रूप से तो वह गहरी विश्रांति में होता है, परंतु उसका अवचेतन मन दिए गए निर्देशों का पालन करता रहता है तो ऐसी अवस्था में ही प्रयोगकर्त्ता अपनी उपचारात्मक प्रक्रिया को संपन्न कर पाता है।
हिप्नोथेरेपी के पंचम सोपान में रोगी के आत्मप्रभावकारिता स्तर को बढ़ाया जाता है, ताकि उसके आंतरिक व्यक्तित्व में रुग्णावस्था में उत्पन्न नकारात्मक विचारों- भावनाओं को नियंत्रित कर आत्मविश्वास व अन्य विधेयात्मक भावों-विचारों के स्तर को बढ़ाया जा सके. मनोविश्लेषण के सिद्धांत के अनुसार उक्त प्रक्रिया को इगो-स्ट्रेन्थिंग कहा जाता है.
चिकित्सा के अगले सोपान में मरीज को हिप्नोसिस की अवस्था से बाहर निकलने के पश्चात की अवस्था एवं अनुभवों के विषय में आवश्यक परामर्श प्रदान किया जाता है. इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि रोगी के मन-मस्तिष्क पर हिप्नोथेरेपी का किसी तरह से कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े अथवा हिप्नोसिस से बाहर आने पर रोगी यदि किसी तरह की असहजता का अनुभव करता है तो ऐसी अवस्था को शीघ्र ही नियंत्रित किया जा सके।
चिकित्सा के अंतिम चरण में रोगी की चेतना को पूर्व की भाँति सामान्य अवस्था में लाया जाता है. इस चरण के साथ ही हिप्नोथेरेपी का सत्र संपूर्ण हो जाता है. प्रयोगकर्त्ता प्रत्येक सत्र को इन्हीं उक्त सात सोपानों के अनुसार संपन्न कराता है और इस चिकित्सा से संबंधित सभी अनुशासनों एवं निर्देशों का पालन करता है, ताकि चिकित्सा-उपचार की प्रक्रिया प्रभावकारी सिद्ध हो. इस शोध अध्ययन से यह स्पष्ट है कि कैंसर जैसी समस्या से लड़ने के लिए औषधि, सर्जरी आदि के साथ हिप्नोथेरेपी को संयुक्त कर एक समग्र एवं कारगर चिकित्सा प्रणाली को विकसित किया जा सकता है।
Disclaimer -
इस पोस्ट में जो जानकारी दी जा रही है यह इंटरनेट के माध्यम से मिली है इसलिए इस जानकारी को उपयोग करने से पहले चिकित्सकों से अच्छी तरह परामर्श और विचार - विमर्श करलें क्योंकि किसी भी तरह की लाभ या हानि का उत्तरदायित्व जानकारी साझा करने बाले का नहीं होगा....
Amit Sharma
Writer